Sunday, 24 May 2020

आप की कामयाबी का रास्ता और की कामयाबी से होकर गुजरता है

आज का विषय बहुत ही खास विषय हैआज के विषय में हमने बात की है कामयाबी की कामयाबी किसे नहीं चाहिए हर व्यक्ति कामयाब होना चाहता है और कामयाबी पर सबका अधिकार भी है

परंतु इस प्रकृति में कामयाबी के कुछ रहस्य छुपे हैं कुछ नियम है जिनका हमें पालन करना है उनको समझना है।
तभी हम कामयाब हो सकते हैं आज मैं आपके साथ कामयाबी के कुछ रहस्यात्मक नियमों पर चर्चा करना चाहूंगी आप भी इस चर्चा पर अपना मत व्यक्त करें।

कभी आपने सोचा है एक कामयाब व्यक्ति के पीछे उसकी कामयाबी का क्या रहस्य  रहा होगा। मुझे भी यह बात काफी समय बाद समझ आई कामयाबी का एक नियम है दूसरों को कामयाब करना यह 100% सत्य है और बहुत बड़ा रहस्य है प्रकृति का, मैं इस बात को सिद्ध कर सकती हूं।

        एक शिक्षक कब बहुत कामयाब माना जाता है ??जब उसके शिष्य भी उसी की तरह कामयाब होते‌ है। जब हमें पता चलता है यह बच्चा इस शिक्षक से पढ़कर अव्वल अंको से उत्तीर्ण हुआ हैं तो इसके पीछे क्या नियम लागू होता है शिक्षक ने अपने शिष्यों को कामयाब किया, तो वह भी कामयाब हो गया उसके पास और बच्चे आए सीखने के लिए वह शिक्षक यह नहीं सोचता कि मैं अगर अपनी शिक्षा को अपने शिष्यों में बांट दूंगा तो मेरा ज्ञान खत्म हो जाएगा अपितु अपने शिष्य को कामयाब करने पर एक शिक्षक की भी प्रसिद्धि बढ़ती है हम जब भी कोई कार्य करें तो हमें यह बात अवश्य ध्यान रखनी चाहिए कि हमारी वजह से दूसरों की भलाई जरूर हो
        एक व्यापारी तभी कामयाब होता है जब वह खुद के मुनाफे से पहले अपने कस्टमर के बारे में सोचें। आज के समय में वही कंपनी ब्रांड बनती है जो अपने कस्टमर को क्वालिटी सर्विस देते हैं इसके पीछे भी यही नियम लागू होता है कोई भी कंपनी पहले अपने कस्टमर्स को क्वालिटी सर्विस देती है जिससे उनकी कामयाबी जुड़ी होती है।click here buy gulaab jamun

        कभी किसी प्रसिद्ध डॉक्टर के बारे में सोचिए जो अपने मरीजों को ठीक करने के लिए उनके साथ दिमाग से नहीं दिल से जुड़ता है अपने हर मरीज को ठीक करने के लिए वह मेहनत करता है उनकी जटिल समस्याओं को सुलझाता है मरीज को ठीक करना उसका सर्वप्रथम कर्म है उसका एक ही कर्म होता है कि उसे उस मरीज को ठीक करना है मतलब उसको शारीरिक रूप से कामयाब करना है और जब मरीज ठीक हो जाता है तो मरीज ठीक  होने के बाद उस अच्छे डॉक्टर के विषय में और लोगों से बताता हैं जिससे डॉक्टर को कामयाबी मिलती है
        सोचिए आप किसी कंपनी में कार्यरत है जब आप कंपनी के लिए अच्छा कार्य करते हैं जिससे कंपनी की ग्रोथ होती है तो वह कंपनी भी आपके ग्रोथ का ख्याल रखती है तो जब आपने कंपनी को कामयाब किया तो कंपनी ने भी आपको कामयाब किया


इस विषय पर गहनता से विचार करिएगा और सोचिए की दूसरों को फायदा पहुंचा कर हमें क्या फायदा है इस संदर्भ में आप भी अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं



Wednesday, 20 May 2020

How does mental pollution affects our brain??

Yes, our thoughts can be harmful, thoughts affects not just our brain but our entire body. Worry, anxiety, depression etc. could cause serious neurological problems, clouded thinking causes harm in one's progress in life, eventually leading to health issues it can create either mental imbalance or physical or may be both.

Fear of failure or fear of losing your belongings or to satisfy one's ego have harmful effects in the long run.

We are what we think and what we think defines a lot about our health. Many medical studies have proved that our negative thoughts lead to anxiety and depression which effect the hormones and eventually all organs, that are already stressed due to wrong diet, starts to malfunction resulting into blood pressure, diabetic, heart issues, thyroid and many more. 


Mental pollution is another term to unwanted thoughts, negative thoughts and over thinking. These pollution leads to Anger, jealousy, greed, lust and affection. However when used in wrong way it creates more problems.

Mind is instrument through which we see, sense, talk, smell and hear. So mind is directly responsible for our emotional and physical well-being.



मानसिक प्रदूषण


प्रतिदिन हमारे मस्तिष्क में कितने प्रकार के विचार उत्पन्न होते हैं सकारात्मक व नकारात्मक। कभी आपने सोचा है? इन विचारों से हमारे मस्तिष्क पर कैसा प्रभाव पड़ता है?

Discover latest Indian Blogs सकारात्मक विचार हमें मानसिक रूप से स्वस्थ व खुश रखते हैं परंतु नकारात्मक विचार उतने ही भयावह होते हैं जो हमारे मस्तिष्क की उपजाऊता व विकास को शून्य पर लाकर रख देते हैं आज हम इसी तरह से उत्पन्न नकारात्मक विचारों से होने वाले मानसिक प्रदूषण के विषय में बात करेंगे।

आपने विभिन्न प्रकार के प्रदूषण के बारे में सुना वह पढ़ा होगा जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, थल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण इत्यादि।

परंतु कभी आपने मानसिक प्रदूषण के विषय में नहीं पढ़ा होगा। प्रदूषण कोई भी हो हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। अब प्रश्न उठता है मानसिक प्रदूषण उत्पन्न कैसे होता है? उसके क्या कुप्रभाव हो सकते हैं? और इससे कैसे बचा जा सकता है?


मानसिक प्रदूषण के निम्न कारणों में से, एक कारण है।- मस्तिष्क में बुरे विचारों का आगमन, जो हमारे मानसिक प्रदूषण का कारण बनता है। और आज के व्यस्त जीवन में जहां सब खुद में और काम में इतना व्यस्त हैं, कि उनके आसपास किशोरावस्था के बालक जो इस समय इस समस्या से सबसे अधिक ग्रस्त हैं। उन पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

किशोरावस्था वह अवस्था व समय होता है, जिसमें बालक का सामाजिक और व्यक्तित्व का विकास होता है। इस समय किशोरों में एक जुनून भी होता है कुछ कर दिखाने का इस जुनून को सही दिशा देने की जरूरत है आप सभी अपने बच्चों के लिए ही यही चाहते होंगे ना।



जहां माता-पिता दोनों कार्यशील होते हैं तो वह अपने किशोर बालकों पर उतना ध्यान नहीं दे पाते जिस कारण बालक ज्यादा समय अकेले रहते हैं या अपना समय सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बिताते हैं सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बालक का मन विचलित हो सकता है वह सोशल नेटवर्किंग साइट से कुछ गलत गतिविधियों का हिस्सा बन सकता है  यह समस्या आज के आधुनिक समय में सबसे ज्यादा किशोरों  में है। मन में बुरे विचार सिर्फ किशोरों के मन में ही नहीं आते इसका शिकार तो हम सब हैं कहते हैं ना खाली दिमाग शैतान का घर होता है यह कथन बिल्कुल सत्य है क्योंकि अगर कोई चोर है, कोई झूठ बोलता है, और अगर कोई किसी का मर्डर कर सकता है।हम आए दिन कितने सारे रेप केस के बारे में पढ़ते हैं तो यह सब मानव की खराब मानसिकता के कारण ही तो होता है अगर इस खराब मानसिकता को ही खत्म कर दिया जाए तो इसके परिणाम सकारात्मक होंगे लोगों को ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित किया जाए इससे बचने के लिए।

 

 मानसिक प्रदूषण के कुप्रभाव निम्नलिखित है।-

  • बालक गलत रास्ते पर जा सकते हैं।

  • मानसिक विकास कम होता है।

  • पढ़ाई लिखाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

  • बच्चे बड़ों का सम्मान नहीं करते।

  • आज्ञा का पालन नहीं करते और अनुशासन हीन बन जाते हैं। जीवन में अनुशासन ना हो तो बालक अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते।

  • क्रोध आना स्वभाविक है।

  • सही और गलत का फैसला न कर पाना।

  • झूठ बोलना।

किशोरावस्था में इस प्रकार के मानसिक प्रदूषण से बचाने के लिए क्या करें।-

  • हमें अपने किशोर बालकों से ज्यादा से ज्यादा बातें करनी चाहिए उनके साथ समय बिताना चाहिए।

  • उन्हें किसी न किसी कार्य में व्यस्त रख सकते हैं जो उनकी पसंद का हो जैसे- फुटबॉल इससे शारीरिक विकास भी होता है और मानसिक स्फूर्ति भी आती है।

  • कला करने के लिए उन्हें प्रेरित कर सकते है।  इससे मन प्रसन्न होता है और सृजनात्मक बनता है

  • उनको मेडिटेशन करने के लिए प्रेरित करें इससे दिमाग शांत रहता है वह तेज होता है

  • अगर उन्हें टेक्नोलॉजी पसंद है तो उनका मार्गदर्शन करें टेक्नोलॉजी को सही रूप से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।क्योंकि आज के युग में हम अपने बालकों को टेक्नोलॉजी से वंचित भी नहीं रख सकते।

  • उनको अच्छी किताबें पढ़ने के लिए ताकि उनके मन में सकारात्मक विचार आए उनको उत्साहित करें आगे बढ़ने के लिए।  

  •    मानसिक प्रदूषण पर चर्चा जारी रहेगी मानसिक प्रदूषण को लेकर आप भी अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं

इस लेख में, मैंं आपके साथ कुछ मोटिवेशनल बुक्स केे लिंक्स तथा कुछ ऑनलाइन अच्छे कोर्स जो बच्चे कर सकतेे हैclick here buy this amazing book in just 94 rs. 
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लेखिका मेघा जैन